Thursday, 11 May 2017

वकील - एक सामाजिक अभियन्ता

वकीलों को सामाजिक अभियन्ता भी कहा जाता है। आप तो जानते ही हैं कि हमारी दिन-चर्या एवं हमारा समाज, सभी कुछ कानून से बंधा है। वकीलों का कार्य है इन कानूनों को समझना और हम सबको अपना जीवन सफल बनाने में मदद करना। अनेक वकील विपदाग्रस्त लोगों की मदद करते हैं और महिला अधिकार जैसे क्षेत्रों में अपना योगदान देते हैं। यदि आप लोगों के जीवन में एक बेहतर कल के लिए परिवर्तन लाना चाहते हैं तो विधि-शास्त्र सर्वोत्तम पथ है।

वकील समान्य एवं असामान्य स्थितियों में अपने सामान्य ज्ञान का प्रयोग कर प्रश्नों का उत्तर खोजते हैं। यदि आप होशियार एवं हाज़िर जवाब हैं, तो आप निश्चय ही सफल वकील बन सकते हैं।

संविधानिक विधि का जटिल प्रश्न हो या फिर सड़क-कानून तोड़ने जैसा सामान्य विषय, वकील सभी प्रकार की स्थितियों में अपनी बुध्दि का प्रयोग कर सवालों के जवाब ढूंढते हैं।

वकील जीवन के हर छेत्र से संबंधित लोगों के साथ कार्य करते हैं, कानून समझते एवं समझाते हैं और विधि-विषयक सिध्दान्तों का प्रयोग कर लोगों की छोटी-बड़ी परेशानियों का समाधान ढूंढते हैं। सीधे शब्दों में, एक अच्छा वकील वो है जो कि तीव्र बुध्दि है और अपने सामान्य ज्ञान की शक्ति से सामान्य एवं असामान्य परेशानियों का हल ढूंढते हैं।

Friday, 31 March 2017

लक्ष्मण रेखा एक प्रतीक :-

***रामायण में अगर कोई एक शब्द जिससे संबंधित घटनाक्रम बाद में अत्यंत संवेदनशील व महत्वपूर्ण बन गया और जिसका उपयोग कालांतर में युगों-युगों तक, मुहावरों, लोकोक्तियों, कहावतों, कहानियों, धार्मिक उपदेशों में, निरंतर हो रहा है तो वो यकीनन लक्ष्मण-रेखा शब्द ही होना चाहिए।
क्या रामायण में यह लक्ष्मण-रेखा सिर्फ माता सीता के लिए खिंची गई थी? यकीनन उद्देश्य तो जंगल में माता सीता की सुरक्षा ही थी। किसी अनजान का बाहर से भीतर प्रवेश इस रेखा के बाद वर्जित था। अर्थात यह रावण के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक थी। इस लक्ष्मण-रेखा को सिर्फ एक सुरक्षा कवच न मानते हुए अगर संकेत और प्रतीक की तरह देखा जाये, एक विचारधारा व दृष्टिकोण के रूप में लिया जाये तो कई लक्ष्मण-रेखाएं रामायण के हर चरित्र के लिए अदृश्य रूप से ही सही, मगर इस धर्म-ग्रंथ में उपस्थित है। अगर सीधे और सरल शब्दार्थ में कहना हो तो इसे एक सीमा के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। यह सामाजिक मनुष्य के स्वतंत्रता की सीमा हो सकती है। आचरण व अधिकारों की सीमा हो सकती है। चाहत-इच्छाओं-महत्वाकांक्षाओं की सीमा हो सकती है। रिश्तों-भावों में बहने की सीमा हो सकती है। सहनशीलता से लेकर अत्याचार सहने तक की भी सीमा हो सकती है। और व्यावहारिक जीवनशैली में दिशा-निर्देशन भी हो सकती है। लक्ष्मण-रेखा तो दशरथ और कैकेयी की भी थी, जिसे लांघने का खमियाजा फिर पूरे राजवंश ने भोगा। लक्ष्मण-रेखा तो वानर राज बलि की भी थी। संक्षिप्त में कहें तो लक्ष्मण-रेखा हर एक चरित्र की है और होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ ने अपनी-अपनी लक्ष्मण-रेखाओं को सहजता, सरलता व समयानुसार स्वीकार किया तो कइयों ने इसका जाने-अनजाने ही सही उल्लंघन किया। शायद रामायण से समाज को यह संदेश तो चला ही गया कि लक्ष्मण-रेखाएं किसी को भी नहीं लांघनी चाहिए। फिर चाहे वह शक्तिशाली शिव-भक्त असुर रावण ही क्यूं न हो। मगर हम इस बृहद् भावार्थ को और इसमें छिपे हुए गहरे संदेश को न तो समझ पाते हैं न ही आत्मसात् कर पाते हैं। वैसे विभिन्न लक्ष्मण-रेखाओं को हर हाल में मानते हुए अपना कर्तव्य-पालन के कारण ही राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये।**
#भारतमेराधर्म
#AdvAnshuman

Friday, 17 March 2017

गायत्री मंत्र का पाठ पाकिस्तानी पी. एम. के सामने पाकिस्तान में:-

@PMOIndia गायत्री मंत्र पाठ पाकिस्तानी PM के सामने वो भी पाकिस्तान में! It's real magic of our PM Modi Jee! भारतमाता की जय! #भारतमेराधर्म #AdvAnshuman http://zeenews.india.com/hindi/india/a-girl-sang-gayatri-mantra-before-pakistan-pm-nawaz-sharif-in-karachi-watch-video/321444 Via MyNt

Sunday, 12 February 2017

कष्टदायक, विद्वेष पूर्ण विचारों की निंदा:-

क्षमा के साथ कहना पड़ रहा है कि, सेन्ट्रल बार के गांधी सभागार में स्थापित **महात्मा गांधी की प्रतिमा* जिस किसी को भी जयपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एन.एम.रांका जी (प्रतिमा दानदाता संस्था के प्रमुख) के पिता सी लगती है, वे अपने श्री-नेत्रों का किसी नेत्र चिकित्सक के पास जाकर इलाज कराने का कष्ट करें, क्योंकि बापू की जो प्रतिमा दी सेन्ट्रल बार एसोसिएशन 'बनारस' वाराणसी के सभागार में स्थापित है वह "ध्यानयोग मुद्रा" में है! इसे समझने के लिए अपने अंदर क्षमता उत्पन्न करनी होगी, जिसका प्रयास मैं भी निरंतर कर रहा हूँ!
***मेरी उपरोक्त बातों से यदि किसी को कष्ट हुआ हो तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ! मेरी उक्त बातें किसी को छोटा साबित करने के लिए नहीं हैं! उक्त बातों को लिखने के उपरांत मैं किसी भी प्रकार के दण्ड को तत्पर हूँ तथा आप दण्ड देने को स्वतंत्र हैं!***
#AdvAnshuman

Thursday, 9 February 2017

न्याय देखो:-

दलाल घूमते रहेगें देखो,
काले कोटा देखों बेकाम होगें,
बिका है मुंसिफ अपना देखों,
'मान' यही सदा से हुआ किया है!

बड़ी हवेली का 'मान' न्याय देखो
हिली है जिसकी बुनियाद देखो,
खड़ा है बाहर वो फरियाद लेकर,
अंदर हाकिम का ज़मीर मरा हुआ है!
#AdvAnshuman

न सलाम होगा:-

जहा में ये पैगाम आम होगा,
ग़ुरूर वालों का नाम होगा,
झुका जमाना जिसके आगे,
'मान' का उसको न सलाम होगा!

अभी अभी वह बड़ा हुआ,
तमीज आने में वक्त लगेगा,
उठी जो गर्दन उसकी देखों,
'मान' न सजदे तमाम होगा!
#AdvAnshuman

वो बदल गये हैं:-

किया जो तूने थोड़ा इज़ाफा,
सनम हमारे मचल गये हैं,
अभी तो किस्सा शुरु हुआ है,
'मान' देखों वो बदल गये हैं!

अंदाज उनका नर्म न होता
यह सच हम जान गये हैं
मिली जगह जो थोड़ी आगे
तबीयत 'मान' अभी से गर्म हुयी है!
#AdvAnshuman

Tuesday, 31 January 2017

पैमाने तुम्हारे होगें!

जितना दबाना है, दबा लो मुझको,
जितना हराना है, हरा लो मुझको,
जीत हार के पैमाने तुम्हारे होगें!
बीमारी तुम्हारी है, बीमार हम होगें,
जबतक गंगा उल्टी बहेंगी बहा लो उसको!
समय के तूफान में, किश्ती से उड़ जोओगे
हो अगर दम तुमें, तो आजमा लो मुझको,
'मान' सर कलम को तैयार बैठा है,
हो गर सच्चे तो हाथ में खन्जर उठालो यारों!
#AdvAnshuman

Sunday, 29 January 2017

अन्तहीन विषय बनता जा रहा है, "प्रातःकालीन न्यायालय अवधि":-

अन्तहीन विषय बनता जा रहा है, "प्रातःकालीन न्यायालय अवधि"
*2014 में मई जून माह पूरे 2 माह की 'कार्य से विरत' (हड़ताल) का प्रस्ताव
*फिर बार काउंसिल द्वारा हर माह की 28 तारीख को 'कार्य से विरत' (हड़ताल) का प्रस्ताव
*फिर उच्च न्यायलय के द्वारा 8 से 2 व 10 से 4 बजे की न्यायालय अवधि को चुने का प्रस्ताव
*2015 में साधारण सभा ने 10 से 4 की समयावधि को चुना क्योंकि वे पूर्व की भांति 6.30 से 12.30 की अवधि चाहती है
*शायद उसी 2015 की साधारण सभा ने यह भी पारित किया कि बार काउंसिल के पूर्व  के प्रस्ताव को मानते हुये 28 तारीख की 'कार्य से विरत' (हड़ताल) जारी रहेगी
*2015 में ही शायद दी बनारस बार एसोसिएशन ने यह प्रस्ताव पारित किया की 28 तारीख का 'कार्य से विरत' (हड़ताल) का प्रस्ताव हमारे बार से नहीं सेन्ट्रल बार से पारित हुआ है
*फिर 2016 में 28 तारीख का 'कार्य से विरत' (हड़ताल) का प्रस्ताव निरन्तर जारी रहा
*2016 में बनारस बार में 8 से 2 का प्रस्ताव पारित किया और सेन्ट्रल बार ने 8 से 2 के प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके कारण न्यायालय अवधि पूरे वर्ष एक समान 10 से 4 रही
*अब 2017 में पुनः 28 का 'कार्य से विरत' (हड़ताल) का प्रस्ताव संयुक्त बार की प्रबंध समिति द्वारा समाप्त!
??? है ना अन्तहीन विषय ???
***समस्या का एक मात्र समाधान:- हर माह के 28 तारीख का 'कार्य से विरत' (हड़ताल) अर्थात प्रातःकालीन न्यायालय अवधि के आंदोलन पर संयुक्त बार के साधारण सभा की बैठक आहूत कर सभी सदस्यों का 'मतदान' करा लिया जायें और समस्या का स्थायी हल दो से तीन दिन में निकल जायेगा!
*** ?? क्या आप मेरी राय से सहमत हैं??***
#AdvAnshuman